अभी अभी तो-विंदा करंदीकर -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Vinda Karandikar 

अभी अभी तो-विंदा करंदीकर -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Vinda Karandikar

 

नज़र में हिलोर शरारत की
अभी तो लगी थी लहराने;
होठों पर थे लगे थिरकने
अभी अभी तो अल्हड़ गाने;

अभी अभी तो शुरू किया था
आँचल से खिलवाड़ लाज ने;
सीधे सादे भाव निरंकुश;
अनजाने थे लगे पिघलने;

दाँतों से यों होठ दबाना
अभी अभी सीखा था तुमने!
कच्ची पक्की अपनी तुकबन्दी
अभी लगा था मैं भी रचने!

उस पहली तुकबन्दी में से
कुछ भी न किसी को भाता है;
पर मेरा मन उसे याद कर
कभी कसकता, खिल जाता है।

(अनुवाद : स्मिता दात्ये)

 

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