अब सहा जाता नहीं-गीत-अगीत-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj 

अब सहा जाता नहीं-गीत-अगीत-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

अब तुम्हारे बिन नहीं लगता कहीं भी मन-
बताओ क्या करूँ?

नींद तक से हो गई है आजकल अनबन-
बताओ क्या करूँ?

धूप भाती है न भाती छाँव है,
गेह तक लगता पराया गाँव है,
और इस पर रात आती है बहुत बनठन-
बताओ क्या करूँ?

चैन है दिन में न कल है रात में,
क्योंकि चिड़-चिड़ कर ज़रा-सी बात में,
हर खुशी करने लगी है दिन-ब-दिन अनशन-
बताओ क्या करूँ?

पर्व हो या तीज या त्योहार हो,
हो शरद हेमन्त या पतझार हो,
हो गई हैं सब धुनें इकबारगी बेधुन-
बताओ क्या करूँ?

तन मचलता है लजीली बाँह को,
मन तड़पता है अलक की छाँव को,
लौटकर फिर आ गया है प्रीति का बचपन-
बताओ क्या करूँ?

वक्ष जिस पर सिर तुम्हारा था टिका,
होंठ जिन पर गीत तुमने था लिखा,
हैं सुलगते आज यूँ छिन-छिन कि ज्यों ईधन-
बताओ क्या करूँ?

यह उदासी यह अकेलापन सघन
या जलन यह दाह यह उमड़न घुटन,
अब सहा जाता नहीं यह साँस का ठनगन-
बताओ क्या करूँ?

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