अब मै कहा करउ री माई- शब्द-मारू महला ९ ੴ सतिगुर प्रसादि-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

अब मै कहा करउ री माई- शब्द-मारू महला ९
ੴ सतिगुर प्रसादि-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

अब मै कहा करउ री माई ॥
सगल जनमु बिखिअन सिउ खोइआ सिमरिओ नाहि कनाई ॥1॥रहाउ॥
काल फास जब गर महि मेली तिह सुधि सभ बिसराई ॥
राम नाम बिनु या संकट महि को अब होत सहाई ॥1॥
जो संपति अपनी करि मानी छिन महि भई पराई ॥
कहु नानक यह सोच रही मनि हरि जसु कबहू न गाई ॥2॥2॥1008॥

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