अब मै कउनु उपाउ करउ- शब्द-ੴ सतिगुर प्रसादि धनासरी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

अब मै कउनु उपाउ करउ- शब्द-ੴ सतिगुर प्रसादि
धनासरी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

अब मै कउनु उपाउ करउ ॥
जिह बिधि मन को संसा चूकै भउ निधि पारि परउ ॥1॥रहाउ॥
जनमु पाइ कछु भलो न कीनो ता ते अधिक डरउ ॥
मन बच कम हरि गुन नही गाए यह जीअ सोच धरउ ॥1॥
गुरमति सुनि कछु गिआनु न उपजिओ पसु जिउ उदरु भरउ ॥
कहु नानक प्रभ बिरदु पछानउ तब हउ पतित तरउ ॥2॥4॥685॥

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