अब तो जीने भी दे यार।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

अब तो जीने भी दे यार।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

डाली – डाली पत्ता तोड़ा
कलियों को आहतकर छोड़ा,
बागों की लूटी हरियाली
क्रूर, अभय लगता वनमाली।
करता जाता अत्याचार
अब तो जीने भी दे यार।

तरुवर जिसको दिया सहारा
आया वही सम्भाले आरा,
भूला फूलों की सित माला
जिससे अबतक था तन पाला।
किया वही है पहला वार
अब तो जीने भी दे यार।

दुनिया का यह रंग पुराना
अपना ही होता बेगाना,
वह पानी जो ठहरा होगा
तल भी उसका गहरा होगा।
मुश्किल पाना इससे पार
अब तो जीने भी दे यार।

 

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