अब तुम्हारे ही सहारे-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

अब तुम्हारे ही सहारे-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

अब तुम्हारे ही सहारे!

हो लगाते पार तुम नित,
डूबते बेड़े अनगिनत,
एक मेरी भी लगा दो, ओ दुलारे ! उस किनारे!
अब तुम्हारे ही सहारे!

माँगते तुम नाव का कर,
सोचता हूँ मैं नयन भर,
क्या तुम्हें दूँ प्राण ! तन-मन-धन सभी जब हैं तुम्हारे!
अब तुम्हारे ही सहारे!

यदि हुबा दी नाव तुमने,
यह रहेगा सोच मन में,
‘था नहीं माँझी चतुर’-कह हँसेंगे लोग सारे!
अब तुम्हारे ही सहारे!

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