अब और प्रेम के फंद परे-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra  

अब और प्रेम के फंद परे-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

 

अब और प्रेम के फंद परे
हमें पूछत- कौन, कहाँ तू रहै ।
अहै मेरेह भाग की बात अहो तुम
सों न कछु ‘हरिचन्द’ कहै ।
यह कौन सी रीति अहै हरिजू तेहि
भारत हौ तुमको जो चहै ।
चह भूलि गयो जो कही तुमने हम
तेरे अहै तू हमारी अहै ।

 

 

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