अपराध-धूप और धुआँ -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ramdhari Singh Dinkar 

अपराध-धूप और धुआँ -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Ramdhari Singh Dinkar

बापू, लोगे किसका प्रणाम?
सब हाथ जोड़ने आए हैं।

ये वे, जिनकी अंजलियों में
पूजा के फूल नही दिपते,
ये वे, जिनकी मुट्ठी में भी
लोहू के दाग नही छिपते;

ये वे, जिनकी आरती-शिखा
हाथों मे सहमी जाती है;
मन मे अगाध तम की छाया
को पास देख घबराती है।

श्रद्धा के सिर पर ग्लानी-भार,
गौरव की ग्रीवा झुकी हुई ।
व्रणमयी भक्ति की आँखों में
काले-काले घन छाए हैं।

बापू! लोगे किसका प्रणाम,
सब हाथ जोड़ने आए हैं।
(1949)

Leave a Reply