अपना सा एहसास-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

अपना सा एहसास-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

कोई अपना सा एहसास है तेरा
मेरे साथ में ।
जैसे उजली चांदनी सा साथ है
हर रात में ।

जैसे कोई गुलाब गुलजार हुआ है
वीरानो में ।
आने लगा है मेरा भी नाम पागल
दीवानो में ।
अकेला चलने लगा देकर हाथ तेरे
हाथ में ।
कोई अपना सा एहसास है तेरा
मेरे साथ में ।

अक्स खुद का तुझमें ही दूंढने
लगा हूं ।
मना लोगी तुम आकर तो रूठने
लगा हूं ।
तेरा हर लफ़्ज मेरा, तू ही मेरी हर
बात में।
कोई अपना सा एहसास है तेरा
मेरे साथ में ।

मेरे ख्यालों में तुम भी तो इठला
रही हो ।
आइनों को ढककर नैनों को
झुठला रही हो ।
जी रही है तू भी मुझको तेरी हर
सांस में ।
कोई अपना सा एहसास है मेरा
तेरे भी साथ में ।

डूब रहा है दिल दूर तुमसे तेरी हर
याद में ।
भीग रही हो तुम भी मेरे प्यार की
बरसात में ।
कट रहे सदियों से पल पल मिलन
की आस में ।
कोई अपना सा एहसास है हम
दोनो के पास में।।

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