अनुरोध- भग्नदूत अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

अनुरोध- भग्नदूत अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

अभी नहीं-क्षण भर रुक जाओ, महफिल के सुनने वालो!
मत संचित हो कोसो, हे संगीत सुमन चुनने वालो!
नहीं मूक होगी यह वाणी, भंग न होगी तान-
टूट गयी यदि वीणा तो भी झनक उठेंगे प्राण!

दिल्ली जेल, दिसम्बर, 1932

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