अनुभव-कविता-डॉ. दिनेश चमोला शैलेश-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dr. Dinesh Chamola Shailesh

अनुभव-कविता-डॉ. दिनेश चमोला शैलेश-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dr. Dinesh Chamola Shailesh

 

अनुभव नाम होता है
अपनी गलतियों की पुनरावृति का
जिसे प्रत्यक्षतः
नहीं स्वीकारना चाहता
कोई भी

श्रेय
वीरता और साहस का
बटोरना चाहता है आदमी
जब-तब अपने नाम पर….,
लेकिन अपनी पराजय व असमर्थता को
मढ़ देता है वह
ईश्वर, अल्लाह या पीर-पैगंबरों के नाम
कि ‘ऐसी ही इच्छा थी उनकी’
कैसे हो सकता था इससे बाहर ?

किंतु किसी
अजेय दुर्ग व महान उपलब्धि की प्राप्ति पर
फुला देता है वह फिर
कई विस्त अपना सीना
कि ‘करना पड़ा है दिन-रात उसे
अपना खून-पसीना एक
इस सफलता को पाने में’

नहीं स्वीकारता है
दोगला आदमी
अपनी अभिव्यक्ति के अर्थों को
कहने के तत्काल बाद उन्हें अर्थों में
बटोरता है अनुभव आदमी

शायद सब कुछ…..
नकारात्मक करने व कहने का
अन्यथा अनुभव क्यों नहीं करता
वह दूध को दूध और ……
पानी को पानी की तरह अलग ?

कहीं
अनुभव नाम तो नहीं है
उसकी हीन ग्रंथि, नकारात्मकता
अथवा संकुचित भावनाओं के पुंज का ?

नहीं तो
इससे क्यों नहीं
बटोर पाता आदमी
भीमकाय मानव-जीवन से
लड़ने की वास्तविक शक्ति
या फिर कोई व्यावहारिक अनुभव ?

 

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