अनिल बिस्वास के लिए-कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

अनिल बिस्वास के लिए-कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

हरेक हर्फ़े-तमन्ना इस इज़्तिरार में है
कि फिर नसीब हो दरबारे-यारे-बंदः नवाज़
हर इक ग़ज़ल का सफ़ीना इस इंतज़ार में है
कि आए मिस्ले-सबा फिर अनील की याद

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