अधूरी दास्ताँ-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

अधूरी दास्ताँ-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

मैं पागल आवारा पंछी
अल्हड़ रंग जवानी में ।
बहता था यारों के संग
मौजों की रवानी में ।
बेफिकरी में खुश था यारो
भय का कोई नाम नहीं ।
मुझमे केवल मैं जीता था
तन्हा मेरी कहानी में ।

मूरत कोई मन मन्दिर में
पूजा में शामिल हुई ।
इश्क़ की वो पहली बारिश
मुझको अब हासिल हुई ।
मेरे लफ्ज़ों की चुप्पी को
उसने कह कर तोड़ दिया ।
उसकी धड़कन इस दिल में
हर हद तक शामिल हुई ।

पूर्ण समर्पूण, सच्चा पावन
दोनों ने ऐसा प्रेम किया ।
राधा मोहन जैसा पवित्र
दोनों ने ऐसा प्रेम जिया ।
सारी खुशियाँ, पूरी दुनियाँ
एक दूजे से पूरी थीं ।
बिना मिले ही गये कहानी
दोनों ने कैसा प्रेम किया ।

अश्कों की बारिश में बहकर
एक दूजे को समझाते ।
कैसे दें जाने की इजाजत
उस पल दोनों मर जाते ।
मौत से बदतर जीने को अब
दोनों दिल मजबूर हुए ।
वक़्त की साजिश में दोनों
दिल से दिल अब दूर हुये ।

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