अठी पहरी अठ खंड नावा खंडु सरीरु-गुरू अंगद देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Angad Dev Ji

अठी पहरी अठ खंड नावा खंडु सरीरु-गुरू अंगद देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Angad Dev Ji

अठी पहरी अठ खंड नावा खंडु सरीरु ॥
तिसु विचि नउ निधि नामु एकु भालहि गुणी गहीरु ॥
करमवंती सालाहिआ नानक करि गुरु पीरु ॥
चउथै पहरि सबाह कै सुरतिआ उपजै चाउ ॥
तिना दरीआवा सिउ दोसती मनि मुखि सचा नाउ ॥
ओथै अम्रितु वंडीऐ करमी होइ पसाउ ॥
कंचन काइआ कसीऐ वंनी चड़ै चड़ाउ ॥
जे होवै नदरि सराफ की बहुड़ि न पाई ताउ ॥
सती पहरी सतु भला बहीऐ पड़िआ पासि ॥
ओथै पापु पुंनु बीचारीऐ कूड़ै घटै रासि ॥
ओथै खोटे सटीअहि खरे कीचहि साबासि ॥
बोलणु फादलु नानका दुखु सुखु खसमै पासि ॥1॥146॥

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