अजब हालत हमारी हो गई है-गुमाँ-ग़ज़लें-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

अजब हालत हमारी हो गई है-गुमाँ-ग़ज़लें-जौन एलिया -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaun Elia

अजब हालत हमारी हो गई है
ये दुनिया अब तुम्हारी हो गई है

सुख़न मेरा उदासी है सर-ए-शाम
जो ख़ामोशी पे तारी हो गई है

बहुत ही ख़ुश है दिल अपने किए पर
ज़माने-भर में ख़्वारी हो गई है

वो नाज़ुक-लब है अब जाने ही वाला
मिरी आवाज़ भारी हो गई है

दिल अब दुनिया पे ला’नत कर कि इस की
बहुत ख़िदमत-गुज़ारी हो गई है

यक़ीं मा’ज़ूर है अब और गुमाँ भी
बड़ी बे-रोज़-गारी हो गई है

वो इक बाद-ए-शुमाली-रंग जो थी
शमीम उस की सवारी हो गई है

मिरे पास आ के ख़ंजर भोंक दे तू
बहुत नेज़ा-गुज़ारी हो गई है

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