अगर साथ दोगे……!-कविता-रामेश्वर नाथ मिश्र ‘अनुरोध’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshwar Nath Mishra Anurodh 

अगर साथ दोगे……!-कविता-रामेश्वर नाथ मिश्र ‘अनुरोध’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshwar Nath Mishra Anurodh

अगर साथ दोगे तुम्हारी खुशी है,
नहीं साथ दोगे अकेले चलूँगा ।
जानता, अर्थ-युग है, चुकाना यहाँ
चंद सिक्कों में होता है हर पावना
तुम न कोशिस करो मापने की मगर
तुच्छ सिक्कों से मेरी विमल भावना
मैं छलाता रहा हूँ, छलाता रहूँगा,
मगर आत्मजन को कभी न छलूँगा ।
जानता, विश्व में कब हुई पूर्ण है
मर्त्य मानव की सोची हुई कामना
चूर होता सपन-सौख्य का दोस्तों !
वास्तविकता से होता है जब सामना
लालसा थी यही संग रहूँ उम्र भर,
चाह पूरी किये बिन मगर अब टलूंगा ।
सोचता था रहोगे मेरे साथ तुम
हर खुशी में मेरी और हर क्लेश में
किन्तु क्या जानता था मेरा शत्रु ही
आ मिला है मुझे मित्र के वेश में
तोम तम में यथा दीप जलता सदा
त्यों तुम्हारे लिए मैं हमेशा जलूँगा ।

 

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