अकुल पुरख इकु चलितु उपाइआ-प्रभाती बाणी भगत नामदेव जी की ੴ सतिगुर प्रसादि-शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji

अकुल पुरख इकु चलितु उपाइआ-प्रभाती बाणी भगत नामदेव जी की
ੴ सतिगुर प्रसादि-शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji

अकुल पुरख इकु चलितु उपाइआ ॥
घटि घटि अंतरि ब्रहमु लुकाइआ ॥1॥

जीअ की जोति न जानै कोई ॥
तै मै कीआ सु मालूमु होई ॥1॥रहाउ॥

जिउ प्रगासिआ माटी कु्मभेउ ॥
आप ही करता बीठुलु देउ ॥2॥

जीअ का बंधनु करमु बिआपै ॥
जो किछु कीआ सु आपै आपै ॥3॥

प्रणवति नामदेउ इहु जीउ चितवै सु लहै ॥
अमरु होइ सद आकुल रहै ॥4॥3॥1351॥

 

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