अंतिम स्वर-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

अंतिम स्वर-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

 

जब आर्तनाद की अंतिम ध्वनि
टकराए स्वयं, अंतर्मन में,
जब विकल सांध्य के गीत, टूट
बिखरें अवशेषित जीवन में।

जब सूर्य रश्मि काली होकर
रातों की घातक धार बने,
जब पूरा जगत सिमट कर के
अंधेपन का संसार बने।

अंतिम सोपान की पीढ़ी पर
जब राह सामने हो अदृश्य
हो ध्वनि, करुण विलाप लिए
सम्मुख हो अमावस का रहस्य।

एका आना, एका जाना
जीवन की यही तो पद्धति है,
यदि कहूं कि साथ मेरे आओ
तब तो यह भ्रमित,मेरी मति है।

तुमने है साथ दिया जितना
जीवन मेरा सम्पूर्ण हुआ,
अब मुझे अकेले जाने दो
बहुजन संग चलना पूर्ण हुआ।

ईश्वर! आदेश मुझे दो या
करो सबल, मुझे खुद आने दो
जीवन भर तरसा हूं जिसको
अब तो वह दर्शन पाने दो।

 

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