अंततः-चैत्या-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta 

अंततः-चैत्या-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

 

वे तब भीड़ में भी हुआ करते थे—
शेरवानी और पायजामे में।
फिर वे होते गए।
मंच की सीढ़ियों पर तेज़-तेज़ चढ़ती
साड़ी में से उझकी पड़ती
राजसी एड़ियाँ;
और फिर—
गोलियों से रक्षित शीशे वाले मंच पर पहुँचकर
मीलों दूर बैठाई गई जनता के लिए
बुलेट-प्रूफ़ जैकेट में
अंततः राष्ट्र को समर्पित
एक राजकीय नमस्कार हो गए।

 

Leave a Reply