सखि! आ गये नीम को बौर-एकायन-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

सखि! आ गये नीम को बौर-एकायन-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya, सखि! आ गये नीम को बौर! हुआ चित्रकर्मा वसन्त अवनी-तल पर सिरमौर। आज नीम की कटुता से भी लगा टपकने मादक मधु-रस! क्यों न फड़क फिर उठे तड़पती विह्वलता से मेरी नस-नस! सखि! आ गये नीम को बौर! 'प्रणय-केलि का आयोजन सब करते हैं सब ठौर'- कठिन यत्न से इसी तथ्य के प्रति मैं नयन मूँद…

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विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya

विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya Part 6 विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya Part 5 भीम-प्रवाहिनी-विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya, विफले! विश्वक्षेत्र में खो जा-विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi…

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विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya Part 6

विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya Part 6 मैं अपने पुराने जीर्ण शरीर से मैं अपने पुराने जीर्ण शरीर से मुक्त हो गया हूँ। नया जीवन पाने के उन्माद-मिश्रित आह्लïाद में भी मुझे यह बात नहीं भूलती-नवीन जीवन की प्राप्ति भी उतनी सुखद नहीं है जितना यह ज्ञान कि मेरा पुराना जीवन नष्ट हो गया है। नये जीवन के प्रति मुझे अभी तक मोह नहीं हुआ-अभी तो…

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विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya Part 5 मेरे उर की आलोक-किरण मेरे उर की आलोक-किरण! तेरी आभा से स्पन्दित है मेरा अस्फुट जीवन क्षण-क्षण! मैं ने रजनी का भार सहा, तम वार-पार का ज्वार बहा- पर तारों का आलोक तरल मुझ को चिर अस्वीकार रहा; सुख-शय्या का आह्वान मिला-मति-भ्रामक स्वप्न-वितान मिला- पर तेरे जागरूक प्रहरी का खड्गहस्त ही प्यार रहा! तेरे वर से है अनल-गर्भ बन…

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भीम-प्रवाहिनी-विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

भीम-प्रवाहिनी-विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya, भीम-प्रवाहिनी नदी के कूल पर बैठा मैं दीप जला-जला कर उस में छोड़ता जा रहा हूँ। प्रत्येक दीप का विसर्जन कर मैं सोचता हूँ-'यही मेरा अन्तिम दीप है।' किन्तु जब वह धीरे-धीरे बहुत दूर निकल कर दृष्टि से ओझल हो जाता है, जब श्यामा नदी के वक्ष पर, उस के क्षीण हास्य की अन्तिम आलोक-रेखा बुझ जाती है, तब अपने आगे…

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विफले! विश्वक्षेत्र में खो जा-विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

विफले! विश्वक्षेत्र में खो जा-विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya, विफले! विश्वक्षेत्र में खो जा! पुंजीभूते प्रणय-वेदने! आज विस्मृता हो जा! क्या है प्रेम? घनीभूता इच्छाओं की ज्वाला है! क्या है विरह? प्रेम की बुझती राख-भरा प्याला है! तू? जाने किस-किस जीवन के विच्छेदों की पीड़ा- नभ के कोने-कोने में छा बीज व्यथा का बो जा! विफले! विश्वक्षेत्र में खो जा! नाम प्रणय, पर अन्त:स्थल में फूट…

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मैं जगत को प्यार कर के -विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

मैं जगत को प्यार कर के -विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya, मैं जगत को प्यार कर के लौट आया! सिर झुकाये चल रहा था, जान अपने को अकेला, थक गये थे प्राण, बोझल हो गया जग का झमेला, राह में जाने कहाँ कट-सा गिरा कब जाल कोई- चुम्बनों की छाप से यह पुलक मेरा गात आया। ओ सखे! बोलो कहाँ से तुम हुए थे साथ मेरे- किस…

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तरु पर कुहुक उठी पड़कुलिया-विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

तरु पर कुहुक उठी पड़कुलिया-विश्वप्रिया-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya, तरु पर कुहुक उठी पड़कुलिया- मुझ में सहसा स्मृति-सा बोला- गत वसन्त का सौरभ, छलिया। किसी अचीन्हे कर ने खोला- द्वार किसी भूले यौवन का- फूटा स्मृति संचय का फोला। लगा फेरने मन का मनका पर हा, यह अनहोनी कैसी- बिखर गया सब धन जीवन का! जीवन-माला पहले जैसी- किन्तु एक ही उस में दाना- तू निरुपम…

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